EPISODE · Aug 5, 2024 · 2 MIN
Ambapali | Vishwanath Prasad Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अम्बपाली | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी मंजरियों से भूषितयह सघन सुरोपित आम्र काननसत्य नहीं है, अम्बपाली !-यही कहा तथागत नेझड़ जाएँगी तोते के पंख जैसी पत्तियाँठूँठ हो जाएँगी भुजाएँकोई सम्मोहन नहीं रह जाएगापक्षियों के लिएइस आम्रकुंज में-यही कहा तथागत नेदर्पण से पूछती है अम्बपालीअपने भास्वर, सुरुचिर मणि जैसे नेत्रों से पूछती हैपूछती है भ्रमरवर्णी, स्निग्ध, कुंचित केशों सेतूलिका अंकित भौंहों से पूछती हैपुष्पवासित रत्नभूषित त्वचा सेहोंठों की कांपती कामनाओं सेदेह के स्फुलिंगों से पूछती हैअम्बपालीक्या अन्यथा नहीं हो सकतेसत्यवादी बुद्ध के वचन?
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Ambapali | Vishwanath Prasad Tiwari
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