EPISODE · Jun 2, 2023 · 2 MIN
Antim Unchai | Kunwar Narayan
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अंतिम ऊँचाई - कुँवर नारायणकितना स्पष्ट होता आगे बढ़ते जाने का मतलबअगर दसों दिशाएँ हमारे सामने होतीं,हमारे चारों ओर नहीं।कितना आसान होता चलते चले जानायदि केवल हम चलते होतेबाक़ी सब रुका होता।मैंने अक्सर इस ऊलजलूल दुनिया कोदस सिरों से सोचने और बीस हाथों से पाने की कोशिश मेंअपने लिए बेहद मुश्किल बना लिया है।शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैंकि सब कुछ शुरू से शुरू हो,लेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैं।हमें कोई दिलचस्पी नहीं रहतीकि वह सब कैसे समाप्त होता हैजो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ थाहमारे चाहने पर।दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुएजब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे—जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अबतुममें और उन पत्थरों की कठोरता मेंजिन्हें तुमने जीता है—जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगेऔर काँपोगे नहीं—तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहींसब कुछ जीत लेने मेंऔर अंत तक हिम्मत न हारने में।
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Antim Unchai | Kunwar Narayan
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