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Bachana | Rajesh Joshi

EPISODE · May 3, 2024 · 1 MIN

Bachana | Rajesh Joshi

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

बचाना | राजेश जोशी एक औरत हथेलियों की ओट मेंदीये की काँपती लौ को बुझने से बचा रही हैएक बहुत बूढ़ी औरत कमज़ोर आवाज़ में गुनगुनाते हुएअपनी छोटी बहू को अपनी माँ से सुना गीतसुना रही हैएक बच्चा पानी में गिर पड़े चींटे कोएक हरी पत्ती पर उठाने की कोशिश कर रहा हैएक आदमी एलबम में अपने परिजनों के फोटो लगाते हुएअपने बेटे को उसके दादा दादी और नाना नानी केकिस्से सुना रहा हैबची है यह दुनियाकि कोई न कोई, कहीं न कहीं बचा रहा है हर पलकुछ न कुछ जो ज़रूरी हैअभी अभी कुछ लोगों ने उन किताबों को ढूँढ निकाला हैजिनमें इस शहर की पुरानी इमारतों के प्लास्टर कोतैयार करने की विधियाँ दर्ज थींअब खिरनी वाले मैदान की ढहती जा रही पुरानी इमारतों की मरम्मत की जा रही है पुराने सलीक़े से।

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