EPISODE · Jul 25, 2024 · 1 MIN
Bazaar | Anamika
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बाज़ार | अनामिकासुख ढूँढ़ा, गैया के पीछे बछड़े जैसा दुःख चला आया! जीवन के साथ बँधी मृत्यु चली आई! दिन के पीछे डोलती आई रात बाल खोले हुई। प्रेम के पीछे चली आई दाँत पीसती कछमछाहट! ‘बाई वन गेट वन फ़्री!' लेकिन अतिरेकों के बीच कहीं कुछ तो था जो जस का तस रह गया लिए लुकाठी हाथ- डफ़ली बजाता हुआ और मगन गाता हुआ-‘मन लागो मेरो यार फ़क़ीरी में!
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Bazaar | Anamika
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