EPISODE · Apr 18, 2024 · 1 MIN
Bhadka Rahe Hain Aag | Sahir Ludhianvi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
भड़का रहे हैं आग | साहिर लुधियानवी भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागर से हमख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम।कुछ और बढ़ गए जो अँधेरे तो क्या हुआमायूस तो नहीं हैं तुलू-ए-सहर से हम।ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो हैक्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम।माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सकेकुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम।
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Bhadka Rahe Hain Aag | Sahir Ludhianvi
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