EPISODE · Oct 5, 2025 · 2 MIN
Dekho Socho Samjho | Bhagwati Charan Verma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
देखो-सोचो-समझो | भगवतीचरण वर्मादेखो, सोचो, समझो, सुनो, गुनो औ' जानोइसको, उसको, सम्भव हो निज को पहचानोलेकिन अपना चेहरा जैसा है रहने दो,जीवन की धारा में अपने को बहने दोतुम जो कुछ हो वही रहोगे, मेरी मानो ।वैसे तुम चेतन हो, तुम प्रबुद्ध ज्ञानी होतुम समर्थ, तुम कर्ता, अतिशय अभिमानी होलेकिन अचरज इतना, तुम कितने भोले होऊपर से ठोस दिखो, अन्दर से पोले होबन कर मिट जाने की एक तुम कहानी हो ।पल में रो देते हो, पल में हँस पड़ते हो,अपने में रमकर तुम अपने से लड़ते होपर यह सब तुम करते - इस पर मुझको शक है,दर्शन, मीमांसा - यह फुरसत की बकझक है,जमने की कोशिश में रोज़ तुम उखड़ते हो ।थोड़ी-सी घुटन और थोड़ी रंगीनी में,चुटकी भर मिरचे में, मुट्ठी भर चीनी में,ज़िन्दगी तुम्हारी सीमित है, इतना सच है,इससे जो कुछ ज़्यादा, वह सब तो लालच हैदोस्त उम्र कटने दो इस तमाशबीनी में ।धोखा है प्रेम-बैर, इसको तुम मत ठानोकडुआ या मीठा ,रस तो है छक कर छानो,चलने का अन्त नहीं, दिशा-ज्ञान कच्चा हैभ्रमने का मारग ही सीधा है, सच्चा हैजब-जब थक कर उलझो, तब-तब लम्बी तानो ।
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