EPISODE · Jul 22, 2025 · 1 MIN
Din Ghatenge | Dinesh Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
दिन घटेंगे | दिनेश सिंहजनम के सिरजे हुए दुखउम्र बन-बनकर कटेंगेज़िन्दगी के दिन घटेंगेकुआँ अन्धा बिना पानीघूमती यादें पुरानीप्यास का होना वसन्तीतितलियों से छेड़खानीझरे फूलों से पहाड़े --गन्ध के कब तक रटेंगे ?ज़िन्दगी के दिन घटेंगेचढ़ गए सारे नसेड़ीवक़्त की मीनार टेढ़ी'गिर रही है -- गिर रही है' --हवाओं ने तान छेड़ीमचेगी भगदड़ कि कितने स्वप्नलाशों से पटेंगे ?ज़िन्दगी के दिन घटेंगेपरिन्दे फिर भी चमन मेंखेत-बागों में कि वन मेंचहचहाएँगेनदी बहती रहेगी उसी धुन मेंचप्पुओं के स्वर लहर बनकरकछारों तक उठेंगेज़िन्दगी के दिन घटेंगे
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Din Ghatenge | Dinesh Singh
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