EPISODE · Oct 15, 2023 · 1 MIN
Dopahar Ka Bhojan | Kumar Vikal
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
दोपहर का भोजन | कुमार विकलदुःखदुःख को सहनाकुछ मत कहना—बहुत पुरानी बात है।दुःख सहना, परसब कुछ कहनायही समय की बात है।दुःख को बना के एक कबूतरबिल्ली को अर्पित कर देनाजीवन का अपमान है।दुःख को आँख घूरकर देखोअपने हथियारों को परखोऔर समय आते ही उस परपूरी ताक़त संचय करकेऐसा झड़पोभीगी बिल्ली-सा वह भागेतुम पीछे, वह आगे-आगे।दुःख को कविता में रो देना‘यह कविता की रात है’दुःख से लड़कर कविता लिखनागुरिल्ला शुरुआत है।
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Dopahar Ka Bhojan | Kumar Vikal
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