EPISODE · Nov 19, 2024 · 1 MIN
Jeevan | Agyeya
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
जीवन | अज्ञेयचाबुक खाएभागा जातासागर-तीरेमुँह लटकाएमानो धरे लकीरजमे खारे झागों की—रिरियाता कुत्ता यहपूँछ लड़खड़ाती टांगों के बीच दबाए।कटा हुआजाने-पहचाने सब कुछ सेइस सूखी तपती रेती के विस्तार से,और अजाने-अनपहचाने सब सेदुर्गम, निर्मम, अन्तहीनउस ठण्डे पारावार से!
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Jeevan | Agyeya
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