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Khidkiyan | Kumar Vikal

EPISODE · May 20, 2023 · 2 MIN

Khidkiyan | Kumar Vikal

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

खिड़कियाँ -  कुमार विकलजिन घरों में खिड़कियाँ नहीं होतींउनमें रहने वाले बच्चों कासूरज के साथ किस तरह का रिश्ता होता है?सूरज उन्हें उस अमीर मेहमान —सा लगता हैजो किसी सुदूर शहर सेकभी —कभार आता हैएकाध दिन के लिए घर में रुकता हैसारा वक्त माँ से हँस—हँस के बतियाता हैऔर जाते समयउन सबकी मुठ्ठियों मेंकुछ रुपये ठूँस जाता है|जिन घरों में खिड़कियाँ नहीं होतींवहाँ से धूप बाहर की दीवार से लौट जाती हैजैसे किसी बच्चे के बीमार पड़ने परमाँ की कोई सहेली मिजाजपुर्सी के लिए तो आती हैकिंतु घर की दहलीज़ से हीहाल पूछ पर चली जाती है|जिन घरों में खिड़कियाँ नहीं होतींवहाँ के बच्चों को रोशनी की प्रतीक्षा—कुछ इस तरह से होती हैजिस तरह राखी के कुछ दिनों बादघर के सामने सेपोस्टमैन के गुज़र जाने के बादपहले पोस्टमैन को कोसती हैबाद में रसोई में जाकरअपने भाई की मजबूरी समझ करबहुत रोती है|जिन घरों में खिड़कियाँ नहीं होतींवहाँ पर चाँदनी कुछ इस तरह से आती हैजैसे किसी खिड़कियों वाले घर मेंपक रहे पकवानों की ख़ुशबूदूर तक के घरों में फैल जाती है|जिन घरों में खिड़कियाँ नहीं होतींवहाँ पर कोई लोरियाँ नहीं गाताचाँद को चंदा मामा नहीं कहतापियक्कड़ पिता की आवाज़ ही बच्चों को सुलाती हैऔर किसी औरत के सिसकने की आवाज़चौकीदार के ‘जागते रहो’ स्वर में खो जाती है|

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Khidkiyan | Kumar Vikal

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