EPISODE · May 30, 2023 · 2 MIN
Kitab Padkar Rona | Raghuvir Sahai
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
किताब पढ़कर रोना - रघुवीर सहाय रोया हूँ मैं भी किताब पढ़कर केपर अब याद नहीं कि कौन-सीशायद वह कोई वृत्तांत थापात्र जिसके अनेकबनते थे चारों तरफ़ से मँडराते हुए आते थेपढ़ता जाता और रोता जाता था मैंक्षण-भर में सहसा पहचानायह पढ़ता कुछ और हूँरोता कुछ और हूँदोनों जुड़ गए हैं पढ़ना किताब काऔर रोना मेरे व्यक्ति कालेकिन मैंने जो पढ़ा थाउसे नहीं रोया थापढ़ने ने तो मुझमें रोने का बल दियादु:ख मैंने पाया था बाहर किताब के जीवन सेपढ़ता जाता और रोता जाता था मैंजो पढ़ता हूँ उस पर मैं नहीं रोता हूँबाहर किताब के जीवन से पाता हूँरोने का कारण मैंपर किताब रोना संभव बनाती है।
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Kitab Padkar Rona | Raghuvir Sahai
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