EPISODE · Apr 13, 2026 · 2 MIN
Ma Atithi Hai | Kumar Ambuj
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
माँ अतिथि है | कुमार अम्बुजमाँ घर में आई है लेकिन वह अतिथि हैउसके पास उसके हज़ारों बाक़ी रह गए काम हैंउसके पास उसका अपना घर हैजिसे लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता सूनाजो भरा हुआ है बीते हुए समय सेमाँ धीरे-धीरे चली गई है इतनी दूरकि उसके सबसे स्मरणीय और चमकदार रूप के लिएलौटना होता है कई साल पहले के वक़्त मेंमैं चाहूँ तो भी नहीं रोक सकता माँ को जाने सेभूल चुका हूँ मैं हठ करनादूर-दूर तक नहीं बची रह गई है मुझमें अबोधताधीरे-धीरे मैं ख़ुद चला आया हूँ माँ से इतनी दूरकि मेरे घर में अबमाँ एक अतिथि है।
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Ma Atithi Hai | Kumar Ambuj
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