EPISODE · Mar 10, 2026 · 2 MIN
Main Neer Bhari | Mahadevi Verma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मैं नीर भरी | महादेवी वर्मामैं नीर भरी दु:ख की बदली!स्पंदन में चिर निस्पंद बसा;क्रंदन में आहत विश्व हँसा,नयनों में दीपक-से जलतेपलकों में निर्झरिणी मचली!मेरा पग-पग संगीत-भरा,श्वासों से स्वप्न-पराग झरा,नभ के नव रँग बुनते दुकूल,छाया में मलय-बयार पली!मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल,चिंता का भार, बनी अविरल,रज-कण पर जल-कण हो बरसीनवजीवन-अंकुर बन निकली!पथ को न मलिन करता आना,पद-चिह्न न दे जाता जाना,सुधि मेरे आगम की जग मेंसुख की सिहरन हो अंत खिली!विस्तृत नभ का कोई कोना;मेरा न कभी अपना होना,परिचय इतना इतिहास यहीउमड़ी कल थी मिट आज चली!मैं नीर भरी दु:ख की बदली!
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Main Neer Bhari | Mahadevi Verma
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