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Mangal Gaan | Ashok Vajpayi

EPISODE · Apr 14, 2023 · 2 MIN

Mangal Gaan | Ashok Vajpayi

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

 मंगल गान - अशोक वाजपेयी नदी गा रही हैनदी से नहा कर लौटता देव-शिशु गा रहा है किनारे के किसी झुरमुट में अदृश्य एक चिड़िया गा रही हैनदी तक जाती पगडंडी अपनी हरी घास में धीरे से गा रही हैनदी पर झलकता रक्तिम सूर्यास्त गा रहा हैफ़ीकी सी आभा लिए उभरता अर्धचंद्र गा रहा हैगा रहे हैं सभी एक असमाप्य मंगलकामनामुझे सुनाई नहीं देता पृथ्वी का आकाश का मंगल गान?सुनता हूँ विलाप,चीख पुकार, चीत्कार सुनाई नहीं देता कोई मंगल गान!लगता है सुनाई दे रहा है ईश्वर का सिसकना, आकाश का कोने में जाकर बिलखना,पृथ्वी का अपने निबिड़ एकांत में चीखना।सुनाई नहीं देता कोई मंगल गान। 

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Mangal Gaan | Ashok Vajpayi

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