EPISODE · Feb 28, 2026 · 1 MIN
Mil Hi Jayega Kabhi | Ahmed Mushtaq
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मिल ही जाएगा कभी | अहमद मुश्ताक़मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता हैवो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता हैजिस की साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है इक ज़माना था कि सब एक जगह रहते थेऔर अब कोई कहीं कोई कहीं रहता हैरोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गएइश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता हैदिल फ़सुर्दा तो हुआ देख के उस को लेकिन उम्र भर कौन जवाँ कौन हसीं रहता है फ़सुर्दा: मुरझाया हुआ दर-ओ-बाम: (लाक्षणिक) मकान मकीं: मकान में रहने वाला
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Mil Hi Jayega Kabhi | Ahmed Mushtaq
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