More than style: How First Nations fashion is growing in Australia - शैली से अधिक: ऑस्ट्रेलिया में फर्स्ट नेशंस फैशन कैसे बढ़ रहा है

EPISODE · Feb 24, 2026 · 9 MIN

More than style: How First Nations fashion is growing in Australia - शैली से अधिक: ऑस्ट्रेलिया में फर्स्ट नेशंस फैशन कैसे बढ़ रहा है

from ऑस्ट्रेलिया को जानें

If you’ve spent any time in Australia, you’ve probably noticed how relaxed the style is. You might notice activewear, surf brands and casual clothes everywhere. But there’s another side to Australian fashion. Aboriginal and Torres Strait Islander designers have been creating clothes and accessories for thousands of years — and that work is very much alive today. You’ll see it on runways, in global fashion campaigns and in everyday clothing. Find out what makes First Nations fashion different, how it connects to the environment and what you should be aware of if you want to wear it. - यदि आपने ऑस्ट्रेलिया में कुछ भी समय बिताया है, तो आपने शायद गौर किया होगा कि स्टाइल कितना आरामदायक है। आपको हर जगह एक्टिववियर, सर्फ़ ब्रांड और कैज़ुअल कपड़े नज़र आ सकते हैं। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई फैशन का एक और पहलू भी है। एबोरिजिनल और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर डिज़ाइनर हजारों सालों से कपड़े और एक्सेसरीज़ बना रहे हैं - और यह काम आज भी बहुत ज़िंदा है। आप इसे रनवे पर, वैश्विक फ़ैशन अभियानों में और रोज़मर्रा के कपड़ों में देखेंगे। जानें कि फ़र्स्ट नेशंस के फ़ैशन को क्या अलग बनाता है, यह पर्यावरण से कैसे जुड़ता है और अगर आप इसे पहनना चाहते हैं तो आपको किन चीज़ों के बारे में पता होना चाहिए।

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कमलेशवर द्वारा रचित ये उपन्यास मानवता के दरवाजे पर इतिहास और समय की दस्तक है .... इस उम्मीद के साथ क Robin Singh कमलेशवर द्वारा रचित ये उपन्यास मानवता के दरवाजे पर इतिहास और समय की दस्तक है ....इस उम्मीद के साथ कि भारत ही नहीं ,दुनिया भर में एक के बाद दूसरे पाकिस्तान बनाने की लहू से लथपथ यह परंपरा अब खत्म हो । स्वर - रौबिन सिंह चौहान । जिनगी की राह @ ttb.twr.org/Bhojpuri Thru the Bible - Bhojpuri ई थ्रू द बाइबल (सत्यवचन) कार्यक्रम विश्वव्यापी बाइबल प्रशिक्षण सेवकाई क एगो भाग हवे। ई मूल में Dr. J. Vernon McGee क अभिकल्प हवे। जेवना क 100 से अधिक भाषा में अनुवाद क के अपनावल गइल बा। ई रोजा अलगे से 30 मिनट क रेडियो कार्यक्रम बढ़िया तरीका से श्रोतागण सम्पूर्ण बाइबल में से ले सकेलें। अब अइसने अउरी कार्यक्रम आप सब के ऑनलाइन उपलब्ध बा। हम धन्यवादी बनी की आप सब लोगन परमेश्वर क वचन अऊर अधिक जागे खातिर ए कार्यक्रम क सुने बदे चुनाव कइनों। सोमार से सुक्कर तक रोजाना एगो कार्यक्रम क सुने बदे आप सभन से सिफारिस बा। अगर आप सब हर हफता ए के करब व अगिला इ बरिस में आप सब सम्पूर्ण बाइबल क अध्ययन क लेइब। Shashi Kumar शशि कुमार शनि क Shashi Kumar Holi Special Hubhopper होली (Holi) वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन, जिसे प्रमुखतः धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन इसके अन्य नाम हैं, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए क
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