EPISODE · Sep 9, 2023 · 3 MIN
Neem Ke Phool | Kunwar Narayan
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
नीम के फूल | कुँवर नारायणएक कड़वी-मीठी औषधीय गंध सेभर उठता था घरजब आँगन के नीम में फूल आते।साबुन के बुलबुलों-सेहवा में उड़ते हुए सफ़ेद छोटे-छोटे फूलदो–एक माँ के बालों में उलझे रह जातेजब वो तुलसी घर पर जल चढ़ाकरआँगन से लौटतीं।अजीब सी बात है मैंने उन फूलों को जब भी सोचाबहुवचन में सोचा।उन्हें कुम्हलाते कभी नहीं देखा–उस तरहरंगारंग खिलते भी नहीं देखाजैसे गुलमुहर या कचनार–पर कुछ थाउनके झरने में, खिलने से भी अधिकशालीन और गरिमामय, जो न हर्ष थान विषाद।जब भी याद आता वह विशाल दीर्घायु वृक्षयाद आते उपनिषद् : याद आतीएक स्वच्छ सरल जीवन-शैली : उसकीसदा शान्त छाया में वह एक विचित्र-सीउदार गुणवत्ता जो गर्मी में शीतलता देतीऔर जाड़ों में गर्माहट। याद आती एक तीखीपर मित्र-सी सोंधी खुशबू, जैसे बाबा का स्वभाव।याद आतीं पेड़ के नीचे सबके लिएहमेशा पड़ी रहने वालीबाघ की दो-चार खाटें :निबौलियों से खेलता एक बचपन…याद आता नीम के नीचे रखेपिता के पार्थिव शरीर परसकुचाते फूलों का वह वीतराग झरना–जैसे माँ के बालों से झर रहे हों–नन्हें-नन्हें फूल जो आँसू नहींसान्त्वना लगते थे।
NOW PLAYING
Neem Ke Phool | Kunwar Narayan
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
May 1, 2026 ·16m
Apr 29, 2026 ·46m
Apr 29, 2026 ·18m
Apr 28, 2026 ·49m