EPISODE · Sep 6, 2024 · 2 MIN
Paas | Ashok Vajpeyi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
पास | अशोक वाजपेयी पत्थर के पास था वृक्षवृक्ष के पास थी झाड़ीझाड़ी के पास थी घासघास के पास थी धरतीधरती के पास थी ऊँची चट्टानचट्टान के पास था क़िले का बुर्जबुर्ज के पास था आकाशआकाश के पास था शुन्यशुन्य के पास था अनहद नादनाद के पास था शब्दशब्द के पास था पत्थरसब एक-दूसरे के पास थेपर किसी के पास समय नहीं था।
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Paas | Ashok Vajpeyi
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