EPISODE · Oct 10, 2025 · 2 MIN
Pyar Ke Bahut Chehre Hain | Navin Sagar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
प्यार के बहुत चेहरे हैं / नवीन सागरमैं उसे प्यार करतायदि वहख़ुद वह होतीमैं अपना हृदय खोल देतायदि वहअपने भीतर खुल जातीमैं उसे छूतायदि वह देह होतीऔर मेरे हाथ होते मेरे भाव!मैं उसे प्यार करतायदि मैं पत्ता या हवा होताया मैं ख़ुद को नहीं जानतामैं जब डूब रहा थावह उभर रही थीजिस पल उसकी झलक दिखीमैं कभी-कभी डूब रहा हूँवह अभी-अभी अपने भीतर उभर रही हैमैं उसे प्यार करतायदि वह जानतीमैं ख़ामोशी की लय में अकेला उसे प्यार करता हूँप्यार के बहुत चेहरे हैं।
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Pyar Ke Bahut Chehre Hain | Navin Sagar
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