EPISODE · Jun 6, 2025 · 2 MIN
Rajdhani | Vishwanath Prasad Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
राजधानी | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी इतना आतंक था मन परकि चौथाई तो मर चुका थाउतरने के पहले हीराजधानी के प्लेटफॉर्म परमेरा महानगर प्रवेशनववधू के गृह प्रवेश की तरह थामगर साथियों के साथदौड़ते, लड़खड़ाते और धक्के खातेसीख ही लिये मैंने भी सारे काटलँगड़ी और धोबिया- पाटएक से एक क़िस्से थे वहाँपरियों और विजेताओंआलिमों और शाइरों केप्याले टकराते हुएमैं भी बोलता थासिकंदर और ग़ालिब के अंदाज़ मेंहालाँकि प्याला ही भरताऔर दस्तरख़्वान ही बिछाता रहाशाही महफिलों मेंदिन बीतते रहेमेरी याददाश्त धुँधली होती रहीभूलता रहासाकिन मौजा तप्पा परगनाफिर सूखने लगा पानीजो था आँखों में और मन मेंऔर झरने लगे भावएक-एक कर पीले पत्तों की तरहशोर था इतनाकि करुणा भी पहिए-सी घरघरातीऔर शांति गुरगुराती इंजन-सीइतनी भागमभागकि हास दिखता थादूर से ही उदास निराश हताशवीरता के लिए क्या जगह हो सकती थीउस चक्रव्यूह में?यदि प्रेम करता लड़कियों सेतो धोखा देता किन्हें?इतनी रगड़ी गई चमड़ीभीड़ में और बेरहम मौसम मेंकि कोई अंतर नहीं रह गयामेरे लिए आग और पानी मेंइस तरह एक दिनलौटा जब राजधानी सेतो मृतकाया में उतारा गया मैंअपने गाँव के छोटे-से टीसन पर।
NOW PLAYING
Rajdhani | Vishwanath Prasad Tiwari
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
May 13, 2026 ·13m
May 11, 2026 ·20m
May 6, 2026 ·18m
May 4, 2026 ·15m
May 1, 2026 ·16m