PodParley PodParley
Shashwat | Doodhnath Singh

EPISODE · Jan 12, 2026 · 2 MIN

Shashwat | Doodhnath Singh

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

शाश्वत । दूधनाथ सिंहयह उदासी जन्म से ही है।यह सहज, संभाव्य अकुलाहटमौन में यह दबी घबराहटयह तुम्हारा अंतरिक्ष-अभाव-तटकौन जानेगा कि यह जो बादलों में टँका मेरा हठ—तुम्हारे लिए—यह सचजन्म से ही है।और कोई एक भाषा-विपदऔर कोई एक कवि-पदऔर कोई एक हाहाकारऔर कोई तुम—सतत...कुछ भी हो—सभी कुछ है बराबर... सभी कुछ है व्यर्थसभी कुछ है साधु...लेकिन यह तुम्हारा अंतरिक्ष-अभाव तटयह उदासी-भरा हठ—यहजन्म से ही है।

NOW PLAYING

Shashwat | Doodhnath Singh

0:00 2:18

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

URL copied to clipboard!