EPISODE · Nov 3, 2025 · 1 MIN
Ulahna | Agyeya
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
उलाहना।अज्ञेयनहीं, नहीं, नहीं!मैंने तुम्हें आँखों की ओट कियापर क्या भुलाने को?मैंने अपने दर्द को सहलायापर क्या उसे सुलाने को?मेरा हर मर्माहत उलाहनासाक्षी हुआ कि मैंने अंत तक तुम्हें पुकारा!ओ मेरे प्यार! मैंने तुम्हें बार-बार, बार-बार असीसातो यों नहीं कि मैंने बिछोह को कभी भी स्वीकारा।नहीं, नहीं, नहीं!
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Ulahna | Agyeya
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