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Unka Ghar | Hemant Deolekar

EPISODE · Aug 20, 2025 · 2 MIN

Unka Ghar | Hemant Deolekar

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

उनका  घर | हेमंत देवलेकर आग बरसाती दोपहर मेंतगारियाँ भर- भर करमाल चढ़ा रहे हैं जो ऊपर घर मेरा बना रहे हैं।जिस छत को भरते हैंअपने हाड़ और पसीने सेवे इसकी छाँव में सुस्ताने कभी नहीं आएंगे इतनी तल्लीनता से एक- एक ईंट कीरेत- मसाले की कर रहे तरीवे इस घर  में एक घूँट भर पानी  के लियेकभी नहीं आएंगे |दूर छाँव में खड़ेखड़े हो देखता हूँ वे सब पक्षियों की तरह दिन रातजैसे अपना ही घोंसला बनाने में जुटे हुए उनको शुक्रिया कहने का ख़्याल भीमुझे नहीं आएगा ।एक दिनसीमेंट, चूने, गारे से लथपथयूं चले जायेंगे वे जैसे थे ही नहीं ।मुझे तस्सली होगी कि उन्हेंमेहनताना देकर विदा कियालेकिन उनका बहुत-सा उधार इस घर में छूटा रह जाएगा !

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Unka Ghar | Hemant Deolekar

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