EPISODE · Jan 3, 2024 · 1 MIN
Vagarth | Sunita Jain
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
वागर्थ | सुनीता जैन एक पके फल-सा रसमय शब्द खोजती रहती है रसना जो भले कुछ न कहे पर संवेद में पूरा उतर जाए एक थिरक लय की खोजती रहती हैं उँगलियाँ जो भले ही सुनाई न दे पर साँसों में ताल-सी बज जाए एक वागर्थ ढूँढ़ती रहती हैं आँखों की पुतलियाँ जो हथेलियों-सा कहने और सहने को संपुट कर जाए
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Vagarth | Sunita Jain
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