PODCAST · religion
HANUMAN CHALISA
by Suvayan Dey
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।तुम
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HANUMAN CHALISA
This is a audio of Hanuman Chalisa . This Hanuman Chalisa audio is given by my own voice.
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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।तुम
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Suvayan Dey
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