EPISODE · Jun 27, 2025 · 1 MIN
Aana | Kailash Manhar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
आना | कैलाश मनहरआऊँगाबारिश से भीगे खेतों परक्वार की धूप बनकरचमकता-सा....आऊँगाथके हुए बदन की रगों मेंधारोष्ण दूध की तरहउफनता-सा....आऊँगारूठी हुई प्रेमिका की आँखों मेंमानभरी लालिमा लिएदमकता-सा....आऊँगाअकेले बच्चे के पासनाचती हुई चिड़िया के परों मेंलचकता-सा....आऊँगामकई के दानों में बनकरमिठास,शरद के आसपाससूर्योदय के साथचूमने को तुम्हारे खुरदरे हाथज़रूर ज़रूर आऊँगा,करना तुम -- इन्तज़ार....
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Aana | Kailash Manhar
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