EPISODE · Aug 27, 2024 · 1 MIN
Aangan | Ramdarash Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
आँगन | रामदरश मिश्रा तने हुए दो पड़ोसी दरवाज़े एक-दूसरे की आँखों में आँखें धँसाकरगुर्राते रहे कुत्तों की तरहफेंकते रहे आग और धुआँ भरे शब्दों का कोलाहलखाते रहे कसमें एक -दूसरे को समझ लेने कीफिर रात कोएक-दूसरे से मुँह फेरकर सो गयेरात के सन्नाटे मेंदोनों घरों की खिड़कियाँ खुलींप्यार से बोलीं-"कैसी हो बहना?"फिर देर तक दो आँगन आपस में बतियाते रहेएक-दूसरे में आते-जाते रहेऔर हँसते रहे दरवाजों की कसमों पर।
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