EPISODE · Dec 10, 2023 · 2 MIN
Ab Main Suraj Ko Nahi Doobne Dungi | Sarveshwar Dayal Saxena
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा | सर्वेश्वरदयाल सक्सेनाअब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा।देखो मैंने कंधे चौड़े कर लिये हैंमुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैंऔर ढलान पर एड़ियाँ जमाकरखड़ा होना मैंने सीख लिया है।घबराओ मतमैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।सूरज ठीक जब पहाडी से लुढ़कने लगेगामैं कंधे अड़ा दूंगादेखना वह वहीं ठहरा होगा।अब मैं सूरज को नही डूबने दूँगा।मैंने सुना है उसके रथ में तुम होतुम्हें मैं उतार लाना चाहता हूंतुम जो स्वाधीनता की प्रतिमा होतुम जो साहस की मूर्ति होतुम जो धरती का सुख होतुम जो कालातीत प्यार होतुम जो मेरी धमनी का प्रवाह होतुम जो मेरी चेतना का विस्तार होतुम्हें मैं उस रथ से उतार लाना चाहता हूं।रथ के घोड़ेआग उगलते रहेंअब पहिये टस से मस नही होंगेमैंने अपने कंधे चौड़े कर लिये है।कौन रोकेगा तुम्हेंमैंने धरती बड़ी कर ली हैअन्न की सुनहरी बालियों सेमैं तुम्हें सजाऊँगामैंने सीना खोल लिया हैप्यार के गीतो में मैं तुम्हे गाऊँगामैंने दृष्टि बड़ी कर ली हैहर आँखों में तुम्हें सपनों सा फहराऊँगा।सूरज जायेगा भी तो कहाँउसे यहीं रहना होगायहीं हमारी सांसों मेंहमारी रगों मेंहमारे संकल्पों मेंहमारे रतजगों मेंतुम उदास मत होओअब मैं किसी भी सूरज कोनही डूबने दूंगा।
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