अभिलाषा
from Kalam (Hindi Poetry) Hosted by Dr. Sudhanshu Kumar
स्वतंत्रता दिवस के नव प्रभात पर सभी श्रोताओ का इस शो में हम स्वागत करते है। आज हम सभी इस अवसर पर अमर शहीदों के बलिदान को याद करके श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं । देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा को अक्षुण रखने के लिए सैनिकों के त्याग और तपस्या को भुलाया नहीं जा सकता । देश की सीमा पर पहरा देने वाला सैनिक मात्रिभूमि के लिए क्या सोचता है? इसी भावना की भावप्रवण प्रस्तुति है हमारी कविता अभिलाषा । हमें पूर्ण विश्वास है कि अन्य कविताओ की तरह ये भी आप सभी को पसन्द आयेगी।
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