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Kalam (Hindi Poetry) podcast artwork

Kalam (Hindi Poetry)

by Dr. Sudhanshu Kumar

Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Dr. Sudhanshu Kumar. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through words.

From the show's RSS feed, refreshed Aug 12, 2024. Source feed.

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Episodes

  1. निरपेक्ष काल की सापेक्षता

    संसार सागर में समय की सापेक्षता सबके साथ सन्निहित है। स्वयं में निरपेक्ष होते हुए भी वह शाश्वत सापेक्ष है। अगर हम यह मान लें कि वक्त ही जगत में हमें लाया है और कालांतर में वही लेकर जायेगा तो इस कबूतर की तरह हम भी दुनियाभर के झंझावातों से भयमुक्त हो जायेंगे। क्या स्थूल वस्तुओं के साथ हम निरपेक्ष…

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  2. मनोहर

    मनोहर का मस्तिष्क अनियन्त्रित हो गया है। सामान्य जन की भाषा में उसे हम पागल कह सकते हैं। मनोहर जीवन के उस तिराहे पर हैं जहाँ उनका अतीत अच्छा नहीं था लेकिन वर्तमान और भविष्य तो अन्धकार के सागर में गोते लगा रहा है। मानव जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उनके लिए क्या महत्व है? इस पर...

  3. चिकित्सक का धर्म

    पेशेवर डॉक्टर सेवक है या व्यापारी? क्या सेवक को व्यापार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए या व्यापारी को सेवा नहीं करनी चाहिए? जैसे अच्छे और बुरे विचार शरीर के अभिन्न अंग हैं वैसे ही जगत के बाजार में सेवा, व्यापार का अभिन्न अंग है। सेवा में कितना व्यापार होना चाहिए यह वाद-विवाद का विषय है। इस विवाद...

  4. अवसर

    अवसर मिलने पर उसका लाभ लेना मानवीय स्वभाव है। अवसर का लाभ लेना अगर हमारे लिये अच्छा है तो हमारे जन प्रतिनिधियों के लिये भी अच्छा होना चाहिए क्योंकि वे आखिरकार हमारा ही तो प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। चुनाव के पहले गठजोड़ का अवसर सभी दलों को मिला हुआ है। गठबन्धन के अवसर को राजनीतिक दल कैसे भुना रहे…

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  5. काँपती काया

    जीवन के जीव से अलग होने के पहले शरीर किन-किन भौतिक, रासायनिक और मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं से होकर गुजरता है? काया की गति और गतिविधियों में क्रमिक ह्रास काल जनित है। तन की इस अवस्था में उसके शरीर में स्थित अंगतंत्र ही उसका साथ नहीं देते। इसी अवस्था की अनुभूति करयेगी हमारी कविता " काँपती काया " ।

  6. चौराहे पर राजनीतिक चर्चा

    एक बार फिर चुनाव का मौसम आने वाला है। सत्ता की चाहत रखने वाले नेतागण अपनी बाजीगरी दिखाने लगे हैं। उनके गठजोड़ पर गाँव के चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गरम है। आइए इस गर्मागर्म माहौल में अपना हाथ सेंकते हैं हमारी कविता "चौराहे पर राजनीतिक चर्चा" से।

  7. राजनीति में राम

    एक समय था जब भाजपा को अयोध्या के श्रीराम मन्दिर आन्दोलन के कारण साम्प्रदायिक पार्टी कहा जाता था। लेकिन उसी समय जनता ने भाजपा सरकार चुनकर यह बता दिया कि जनभावना का सम्मान करने वाली पार्टी साम्प्रदायिक नहीं हो सकती। आज राम नाम की शक्ति का ही परिणाम है कि भारत देश का शासन राम नाम का जप करने वालों के...

  8. सत्ता का खेल

    राजनीति का अर्थ है सत्ता के लिए संघर्ष। येन केन प्रकारेण सत्ता मिलनी चाहिए। सत्ता मिल जाने के बाद तो कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष होता है। राज्य की नीतियों का निष्पादन तो नौकरशाह करते हैं जो सैद्धांतिक रूप में राजनीति नहीं करते। व्यावहारिक रूप में राजनीति तो हम सभी कहीं न कहीं करते ही हैं।...

  9. आखिरी सन्देश

    व्यक्ति का जीवन संघर्षों की कहानी है। इन्हीं संघर्षों में ही शारीरिक तथा मानसिक पीड़ा और आनंद सन्निहित है। शरीर की जीवन यात्रा में इन अनुभूतियों से प्राणिमात्र का चोली-दामन का साथ है। श्मशान मानव जीवन यात्रा का अन्तिम सत्य है। काया से किए हुए सारे कर्म और धर्म का बन्धन यहीं टूट जाता है। पीड़ा…

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  10. तारिणी

    प्राणिमात्र का जीवन सरल और सहज है। हम मनोविकारों के प्रभाव में आकर ही इसे दुरूह और आडम्बरयुक्त बना देते हैं।वाह्य आडम्बरों के कारण ही समस्यायें आती हैं। ढोंग ही समाज में फैले समस्त कुत्सित मनोविकारों का मूल है। आइये इन्हीं विचारों पर कुठाराघात करते हैं हमारी कविता "तारिणी" से।

  11. प्राचीन से अर्वाचीन

    जिस प्रकार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या को बताया नहीं जा सकता उसी प्रकार सबसे प्राचीन और आधुनिक को हम नहीं बता सकते। प्रत्येक प्राचीन काल का अगला समय आधुनिक होता है और आज का आधुनिकीकरण कल प्राचीन हो जायेगा तथा भविष्य आज की तुलना में आधुनिक होगा। प्राचीन से अर्वाचीन के इन्हीं संदर्भों को ध्यान…

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  12. योग

    योग जीवन जीने की कला है।यह शरीर, चित्तवृत्तियाँ, मनोविकार और मस्तिष्क के परिशोधन का संस्थान है। भारतीय सनातन परंपरा का यह संस्थान भारतीयता का धरोहर है। विश्व को उद्देश्यपूर्ण शांति से जीवन जीने की कला योगसूत्र ने ही दी है। योग के विभिन्न आयामों पर सुनते हैं हमारी कविता " योग "।

  13. पर्यावरण

    स्वस्थ शरीर में स्वच्छ मन का निवास होता है और हमारा स्वास्थ्य हमारे पर्यावरण पर निर्भर करता है। विकास की अन्धी दौड़ में हमने अपने परिवेश का न केवल दोहन किया है अपितु इसे प्रदूषित करके अपने ही पैर पर कुठाराघात कर लिया है। प्रदूषण की विभीषिका और समस्या के समाधान पर सुनते हैं हमारी कविता " पर्यावरण "।

  14. व्यापारिक विद्यापीठ

    आधुनिक शिक्षा का नया फलसफा है कि शिक्षक पेशेवर हों और अपने पेशे के लिए कुछ भी करें। पेशेवर व्यक्ति अपने कार्य में दक्ष तो होता है इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता लेकिन पेशा व्यापार का अनुगामी होता है, इसे भी स्वीकार करना पड़ेगा। शिक्षक होने के लिए पहली शर्त होनी चाहिए कि वह व्यापारी न हो क्योंकि…

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  15. रंग

    रंग का प्राणिमात्र के जीवन में अत्यधिक महत्व है। रंग से ही उनकी रंगत है और रंग से ही वे बेरंग हो जाते हैं। रंग शब्द को अनेक अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है। हमारे रग रग में रंग की भूमिका को प्रकट करेगी हमारी कविता " रंग "।

  16. जन प्रतिनिधि

    हम भारत के लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से देश का शासन करते हैं। हमारा प्रतिनिधि जब पार्टी प्रतिनिधि बन जाय तो हमारा क्या होगा? आज हमारे नेता जी हमारी समस्याओं को सुलझाने के बजाय पार्टी की समस्याओं को सुलझाने में उलझे रहते हैं। हमारे हित में उनका हित उन्हें क्यों नहीं समझ आता? आइए समस्याओं के...

  17. जीवन और जीव

    क्या जगत में जीव का अस्तित्व जीवन से है या जीवन का जीव से अथवा दोनों की सम्भूति एक दूसरे के साहचर्य में ही निहित है? नर और नारी युगल से ही नवल सृजन होता है जिससे जीवन और जीव की निरंतरता जगत में अनन्तकाल से बनी हुई है और बनी रहेगी। पत्नी स्वयं में पूर्ण है पर पति के दिवंगत होने पर अपूर्णता का आभास...

  18. देह के पैंतीस टुकड़े

    अक्सर शारीरिक संबंधों में प्रगाढ़ता को ही प्रेम समझ लिया जाता है। नवयुवक और युवतियाँ शारीरिक आकर्षण को ही प्रेम समझने की भूल कर जाते हैं जिसका वीभत्स परिणाम काया के पैंतीस टुकड़ों के रूप में आता है। हमारे संस्कार, नैतिक मूल्य वास्तव में प्रेम और आकर्षण के अन्तर को बताते हैं और हमें मानवीय मूल्यों...

  19. आधुनिक नारी

    परंपरा और आधुनिकता प्रत्येक समाज की पहचान है। समय के साथ हर किरदार में परिवर्तन हो रहा है। वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे सदियों की परम्पराओं को छोड़कर भारतीय नारी, पुरुष से समानता के लिए तथाकथित देवी स्वरूप को छोड़कर सामान्य नारी ही बने रहना चाहती है। आधुनिक नारी यही चाहती है कि पति…

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  20. दलबदलू

    सत्ता राजनीति के दलदल का कमल है। सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति सेवा के माध्यम से सत्ता तक पहुँचता है। विचारधारा और सिद्धांत राजनीतिज्ञ का दाहिना और बाँया हाथ हुआ करता था लेकिन वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसके दोनों हाथ कट चुके हैं। सेवा के नाम पर सत्ता के लिए दलबदल आम बात हो गई है। आइए...

  21. नूतनता

    नूतनता और परिवर्तन का चोली दामन का सम्बन्ध है। वास्तव में परिवर्तन और नूतनता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आज जो नवीन है कल प्राचीन होगा और प्राचीन भी कल ही रूपांतरित होकर अर्वाचीन हो जाता है। हम हर पल भविष्य को तलाशते रहते हैं किन्तु अगले ही क्षण भूत के गर्त में चले जाते हैं। आइए इस क्षण भंगुर...

  22. रिश्ते

    जीवन में रिश्तों का अपना महत्व है। समय के साथ इनमें गर्मी आती है और कालांतर में ये ठंडे पड़ जाते हैं। रिश्ते रक्त सम्बंध से बने हों, मानवीय अथवा अमानवीय सम्बन्ध से, जीवन में मिठास अथवा खटास सम्बन्धों के कारण ही होते हैं। सम्बन्धों पर चाटुकारों और रायबहादुरों का विशेष प्रभाव पड़ता है। आइये इन्हीं...

  23. राजनीति का पप्पू

    राजनीति में उपनाम और जुमले खूब प्रचलित है। ये नाम राजनीतिज्ञों के व्यक्तित्व और कृतित्व को सटीक दर्शाते हैं। आइये राजनीतिक दाँव पेंच का आनन्द लेते हैं हमारी कविता " राजनीति का पप्पू " से।

  24. प्रारब्ध

    मनुष्य के जीवन में कुछ विषय ऐसे हैं जिन पर उसका वश नहीं चलता जैसे व्यक्ति का जन्म, उसकी धड़कन, साँसो की संख्या, कंठ से उत्पन्न ध्वनियों की संख्या , शारीरिक संरचना, मृत्यु इत्यादि। इन गतिविधियों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है और यही गतिविधियाँ जीवन आधार हैं। इन्हीं गतिविधियों के सहारे जीवन प्रवाह…

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  25. अजनबी

    सोते हुए स्वप्न देखना आम बात है। सपनों में हम कभी परेशान होते हैं तो कभी प्रशन्न होते हैं। कभी डरते हैं तो कभी साहस के साथ लड़ते हैं। क्या स्वप्न में कभी किसी अजनबी से आप की मुलाकात हुई है? जिसके लिए आप बेचैन हुए हों। आइए ऐसे ही एक स्वप्न को देखते हैं हमारी कविता " अजनबी " के माध्यम से।

  26. मन की बात

    सैनिकों के त्याग, बलिदान और बहादुरी के अनेक किस्से और कहानियाँ आप लोगों नें सुना होगा। क्या कभी उनके व्यक्तिगत जीवन में झाँकने का प्रयास कभी किसी ने किया है। आइए आज हम एक सैनिक के मन की बात, उसकी पत्नी की पीड़ा को अपनी कविता " मन की बात " से व्यक्त करने का प्रयास करते हैं।

  27. शिक्षक शिक्षण और वो

    बेसिक शिक्षा में नित नये प्रयोग होते रहते हैं। इसी प्रयोग की कड़ी में एक नया नाम सामने आया है, जिसका नाम है टास्क फोर्स। इस टास्क फोर्स का नाम सुनते ही शिक्षकों में भय व्याप्त हो जाता है। इस भय से कितना गुणवत्तापूर्ण शिक्षण हो रहा है, आइए जानते हैं हमारी कविता "शिक्षक शिक्षण और वो" से।

  28. गुुमनाम परिंदे

    स्वतंत्रता दिवस के खुशनुमा, शरीर में सिहरन पैदा करने वाले प्रभात की बधाई और शुभकामनायें। आजादी के इस अमृत महोत्सव में आज हम उन अमर बलिदानियों को याद करेंगे जिनका देश के किसी भी अभिलेख में नामोनिशान नहीं है। वे गुमनाम हैं। उन्होंनें निष्काम भाव से हमें स्वतंत्रता दिलाई पर खुद काल के गाल में समा…

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  29. स्नेह सूत्र

    भाई-बहन के अटूट विश्वास और प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हम सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत, अभिनन्दन और वंदन करते हैं। वैसे तो इस प्रेम को शब्दों में व्यक्त करना सम्भव नहीं है फिर भी उसके कुछ अंशों को हमारी कविता "स्नेह सूत्र" के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास किया गया है।

  30. गाँव छोड़कर हम बैठे

    आइये आज हम अपने सुखद अतीत में खो जायें। गाँवों में अतीत की भावनाओं की खुशबू को महसूस करें। गाँव से शहर की ओर जाने और विचार परिवर्तन से होने वाली समस्याओं उजागर करते हुए अतीत के आनन्ददायी पलों को भी याद करायेगी हमारी कविता "गाँव छोड़कर हम बैठे"।

  31. हृदय

    हृदय का रक्त से सम्बन्ध अन्योन्याश्रित है। रुधिर वायु और भोजन से समन्वय करके स्थूल काया की गतिविधियों को संचालित करता है तथा तन मन और जीवन का समन्वय प्राणिमात्र की गतिशीलता के लिए आवश्यक है। जीवन काया के साथ अनवरत प्रवाहमान बना रहे , इसी अवधारणा को व्यक्त करेगी हमारी नई कविता " हृदय "। यहाँ दिल…

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  32. भूख

    एक कहावत हम लोग अक्सर सुनते हैं "पेट न होता तो किसी का किसी से भेंट न होता"। भूख जीव के गतिशीलता का प्रमुख कारक है। प्राणिमात्र के सभी इन्द्रियों की चैतन्यता भूख में सन्निहित है। भूख की तीव्रता हमारे कार्य की प्रक्रिया को गतिमान करती है। ज्ञान की जिज्ञासा हो या शान की भूख, प्रेम की प्यास हो या...

  33. निवेदन

    मानव जीवन संघर्ष की गाथा बने। व्यक्ति नवल सृजन खुद करे। उसे किसी बैसाखी की जरूरत महसूस न हो। उसके विचारों में सूक्ष्म सत्ता का आभास तो हो लेकिन वह उससे किसी भी दशा में याचना न करे। वह अपने भाग्य का विधाता खुद बने। इन्हीं भावों का अहसास कराएगी हमारी कविता " निवेदन "।

  34. नारी

    समष्टि में शक्ति निराकार है उसके अनेक साकार रूपों में नारी सर्व शक्तिमान है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योकि ईश्वर को भी मानव रूप में आसुरी शक्तियों का विनाश करने के लिए नारी शक्ति की उपासना करनी पड़ी। सृष्टि का सृजन भी नारी शक्ति के अभाव में असम्भव है। नारी जगत की समस्त रचनात्मक प्रक्रियाओं के...

  35. अश्क (ऑंसू)

    माँ अपनी सन्तान के जीवन को सुखमय बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करती। लेकिन उसकी ही सन्तान उसके प्राण के प्यासे हो जाय तो माँ का क्या हाल होगा। आज हम ऐसी ही दुख भरी कहानी के साथ प्रस्तुत हैं। आइए सुनते हैं माँ भारती के दुख को हमारी कविता "अश्क" से।

  36. राष्ट्रद्रोह

    राष्ट्रद्रोह जघन्य अपराध है। एक देशभक्त अपने प्राण भी देकर देश की रक्षा करता है। अगर कोई व्यक्ति दूसरे देश के साथ मिलकर अपने देश के साथ विश्वासघात करता है और अपने ही देश के लोगों के कत्ल के लिए पैसे का प्रबन्ध करता है, लोगों के आपसी सौहार्द को बिगाड़ता है, सामूहिक नरसंहार में अप्रत्यक्ष भूमिका...

  37. कश्मीर का शत्रुघ्न

    आतंकवाद किसी भी देश की सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक, व्यापारिक और राजनीतिक गतिविधियों में गतिरोध पैदा करके उसकी रीढ़ रज्जु को तोड़ देता है। इसका अद्यतन उदाहरण हमारा केन्द्र शासित राज्य जम्मू-कश्मीर है। यहाँ के रक्तपात को रोकने से लेकर अमन और शांति के लिए जो प्रयास हमारे शत्रुध्न ने किया…

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  38. बुढ़ापे का दर्द

    जीवन के अन्तिम पड़ाव पर बृद्धावस्था की कहानी कह रही है हमारी नयी कविता " बुढ़ापे का दर्द "। बुढ़ापे में दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट के साथ-साथ मानसिक तनाव सर्वाधिक पीड़ादायक होता है। इस समय व्यक्ति की काया के सभी अंग और अंगतंत्र शिथिल होते हुए इहलोक से परलोक की यात्रा की ओर इशारा करने लगते हैं।…

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  39. कामना

    प्रेम शब्दों से व्यक्त नहीं हो सकता। भाव के स्तर पर हृदय से उत्पन्न मस्तिष्क से परे संवेदनाओं के स्पंदन का भावनाओं के रूप में स्फुरण प्रेम को प्रदर्शित करने का एक माध्यम हो सकता है पर प्रेम नहीं। एक प्राणी का दूसरे से प्रेम, प्राणिमात्र का ईश्वर से प्रेम, चेतन का जड़ से प्रेम आदि के प्रदर्शन के...

  40. कर्मरथी

    "कर्मरथी" कर्म के रथ पर सवार उन कर्मवीरों की गाथा है जो दिन-रात अपने काम में तल्लीन रहते हैं। उनके बच्चे और वे खुद भूखे प्यासे रहकर, अपने शरीर की परवाह किए बिना कर्म योग की धारा में गोता लगाते हुए गीता के संदेशों के वाहक हैं। आइये इन्हीं संदेशों को सुनते हैं, हमारी कविता " कर्मरथी " से।

  41. आशा

    आशा उस निराश्रित निर्धन की कहानी है जो हमारे देश के हर समाज में उपेक्षित हैं लेकिन किसी से कुछ माॅगने के बजाय अपने जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओ की पूर्ति स्वयं करती हैं और जीवन जीने की आशा को प्रसन्नता के साथ बनाये रखती हैं। आशा भूख मिटाने के लिए संघर्ष की गाथा है। अपनी कठिनाइयों को कितनी सहजता से…

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  42. पेंशन का टेंशन

    सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन बृद्धावस्था में सुरक्षा कवच था। सरकार ने पेंशन बन्द कर दिया है। पेंशन न मिलने का तनाव कितना है? पेंशन विहीन कर्मचारियों की मनोदशा कैसी है? इसे महसूस करने के लिए हम एक नई कविता "पेंशन की टेंशन" प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि पेंशन न मिलने का दर्द शासन...

  43. श्रीराम

    भगवान श्रीराम के प्राकट्य दिवस रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ आज के हमारे इस एपीसोड में आप सभी का स्वागत है। आइये इस कविता के माध्यम से उनके द्वारा किए गए कार्यों और सन्देशों को आत्मसात करने की चेष्टा करतें हैं।

  44. बुनियाद

    जीवन बुनियाद के बिना नहीं चल सकता । जीवन जीने के लिए अनेक बुनियादों की आवश्यकता पड़ती है। सर्व प्रथम बुनियाद रोटी, कपड़ा और मकान है। इसके बाद शिक्षा जीवन की आधारभूत आवश्यकता है। जीवन के बुनियाद को समेटे हुए प्रस्तुत है हमारी कविया "बुनियाद"।

  45. शहीद ए आज़म

    शहीद दिवस के इस कारुणिक पर्व पर हम समस्त सहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। आज इस पर्व पर शहीदे आजम के शान का सम्मान करते हुए हम हमारी कविता शहीद ए आजम प्रस्तुत कर रहे हैं।

  46. जोगीरा सर रर

    होली के अबीर और गुलाल में सराबोर कर देने वाली हमारी कविता जोगीरा सर र र आप के समक्ष प्रस्तुत है। आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनायें।

  47. कारनामों का दहन

    बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व पर प्रस्तुत है हमारी कविता " कारनामों का दहन " जिसमें मन के कुत्सित विकारों को भस्म करके मन पर विजय पाने की परिकल्पना की गई है।

  48. युद्ध

    युद्ध मानव जीवन के लिए अभिशाप है। इससे किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह राजनेताओं की व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा का परिणाम है। इसकी विभीषिका आम जन को झेलनी पड़ती है। आइए आम जन की पीड़ा को व्यक्त करने वाली हमारी कविता "युद्ध" की विभीषिका को सुनकर महसूस करते हैं।

  49. लोकतंत्र का महापर्व

    उत्तर प्रदेश में इस समय चुनावी बयार बह रही है। गलियों और चौराहों पर मतदाताओं में चर्चा का केन्द्र बिन्दु है किस क्षेत्र से किस पार्टी से किस जाति का प्रत्याशी खड़ा है। कहाॅ क्या बॅट रहा है, कहाँ दावतें हो रही हैं। नेता जी व्यक्तिगत सभी लोगों से आशीर्वाद लेने के लिए सबसे मिल रहे हैं। आइये इसी...

  50. नियतता और परिवर्तन

    सामान्य अर्थों में हम नियतता और परिवर्तन को विपरीत अवधारणायें मानते हैं। इन अवधारणाओं पर अगर हम समग्र रूप से दृष्टिपात करें तो हमें ये एक दूसरे के पूरक लगते हैं। संसार सागर में सब कुछ नियत है, यहाँ तक कि परिवर्तन भी नियत है।

About this show

Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Dr. Sudhanshu Kumar. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through words.

Hosted by

Dr. Sudhanshu Kumar

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Frequently asked questions

How many episodes does Kalam (Hindi Poetry) have?

Kalam (Hindi Poetry) has 84 episodes on PodParley. The most recent episode was published on August 12, 2024.

What is Kalam (Hindi Poetry) about?

Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Dr. Sudhanshu Kumar. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through words.

How often does Kalam (Hindi Poetry) release new episodes?

Kalam (Hindi Poetry) publishes every two weeks, based on its 84 episodes since May 2021.

Who hosts Kalam (Hindi Poetry)?

Kalam (Hindi Poetry) is created and hosted by Dr. Sudhanshu Kumar.
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