EPISODE · May 16, 2026 · 3 MIN
Abhinay | Manglesh Dabral
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अभिनय । मंगलेश डबरालएक गहन आत्मविश्वास से भरकरसुबह निकल पड़ता हूँ घर सेताकि सारा दिन आश्वस्त रह सकूँएक आदमी से मिलते हुए मुस्कराता हूँवह एकाएक देख लेता है मेरी उदासीएक से तपाक-से हाथ मिलाता हूँवह जान जाता है मैं भीतर से हूँ अशांतएक दोस्त के सामने ख़ामोश बैठ जाता हूँवह कहता है तुम दुबले बीमार क्यों दिखते होजिन्होंने मुझे कभी घर में नहीं देखावे कहते हैं अरे आप टी.वी. पर दिखे थे एक दिनबाज़ारों में घूमता हूँ नि:शब्दडिब्बों में बंद हो रहा है पूरा देशपूरा जीवन बिक्री के लिएएक नई रंगीन किताब है जो मेरी कविता केविरोध में आई हैजिसमें छपे सुंदर चेहरों को कोई कष्ट नहींजगह-जगह नृत्य की मुद्राएँ हैं विचार के बदलेजनाब एक पूरी फ़िल्म है लंबीआप ख़रीद लें और भरपूर आनंद उठाएँशेष जो कुछ है अभिनय हैचारों ओर आवाज़ें आ रही हैंमेकअप बदलने का भी समय नहीं हैहत्यारा एक मासूम के कपड़े पहनकर चला आया हैवह जिसे अपने पर गर्व थाएक ख़ुशामदी की आवाज़ में गिड़गिड़ा रहा हैट्रेजडी है संक्षिप्त लंबा प्रहसनहरेक चाहता है किस तरह झपट लूँसर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार।
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