EPISODE · Nov 15, 2023 · 2 MIN
Abhirupa | Anamika
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अभिरूपा | अनामिका नहीं जानती मेरे जीवन का हासिल क्यामेरे वे सारे संबंध जो बन ही नहीं पाएवे मुलाकातें जो हुई ही नहींवे रस्ते जो मुझसे छूट गए, या मैंने छोड़ दियेउड़ के दरवाज़े जो खोले नहीं मैंनेशब्द जो उचारे नहीं और प्रस्ताव जो विचारे नहींमेरे सगे थे वही जिनकी मैं सगी न हुईकरते हैं मेरी परिचर्या इस घने जंगल में वे हीजब आधी रात को फूलती है वह कुमुदनीमेरी हताहत शिराओं में और टूट जाती है नींदएक पक्षी चीखता है कहीं विरह दर्द आसमान भी किसी आहत जटायु साबस गिरा ही चाहता है मेरे कंधों परऔर उमड़ता है हृदय में सन्नाटा प्रलय मेघ साभंते बताइए कैसे समझे कोई कौन सगाबुद्ध ने कहा जिसकी उपस्थिति चित्त की लौ को निष्कंप करेवही सगा अभिरूपा सदा वही जो तुमको मंथरगति से सीधा चलना सिखाए, बढ़ना सिखाएजो ऐसे, जैसे कि युद्धभूमि में हाथी बढ़ता है बौछार तीरों की हर तरफ से झेलता
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