EPISODE · Dec 22, 2025 · 1 MIN
Agnipath | Harivansh Rai Bachchan
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!। हरिवंशराय बच्चनअग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!वृक्ष हों भलें खड़े,हों घने, हों बड़ें,एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत!अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!तू न थकेगा कभी!तू न थमेगा कभी!तू न मुड़ेगा कभी!—कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ!अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!यह महान दृश्य है—चल रहा मनुष्य हैअश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ!अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!
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