EPISODE · Jul 15, 2025 · 2 MIN
Algani | Shahanshah Alam
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अलगनी | शहंशाह आलम अलगनी पर मैंने क्या चीज़ सुखाईकविता की वो गीली किताबेंजिसे बारिश ने पढ़ा था पूरे मन सेजो बारिश मेघालय में होती होगीवही बारिश हुई इस दफ़ा मेरे पटना मेंअलगनी पर मैंने और क्या चीज़ सुखाईकविता की किताबों के अलावाअपने कपड़े… नहीं नअपने जूते… नहीं नअपने मोजे… नहीं नअपना पूरा घर सुखायाधूप के निकलने परऔर अपनी देह को भीटाँगकर रखा अलगनी परअब जब बारिश के बाद ठंड आएगीदस्तक देगी अलगनी ही मेरे दरवाज़े पर।
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