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EPISODE · Nov 15, 2025 · 3 MIN

अमृतपुत्राः

from बालमोदिनी · host सम्भाषणसन्देशः

सिक्खानां गुरोः गोविन्दसिंहस्य चत्वारः पुत्राः मोघलैः सह प्रवृत्ते युद्धे वीरमरणं प्राप्तवन्तः आसन् । एतत् वचनं श्रुत्वा पत्नी पुत्रवियोगेन नितरां दुःखसन्तप्ता भूत्वा उच्चैः रोदनम् अकरोत् । तदा गोविन्दसिंहः अवदत् ये धर्मयुद्धे वीरगतिं प्राप्नुवन्ति ते अमृतपुत्राः । तस्य विषये गर्वं भवतु । पुत्रवियोगं प्राप्तवन्तः जन्मदातारः सान्त्वनीयाः अस्माभिः । प्रजाः एव अस्मत्पुत्राः इति चिन्तय । चिन्तनपरिवर्तनात् दुःखम् आनन्देन परिणमति । अतः ज्ञानिनः वदन्ति — प्रपञ्चे निर्लिप्ताः सन्तः वयं जीवेम । कर्तव्यपरायणाः भवेम' इति ।(“केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालयस्य अष्टादशीयोजनान्तर्गततया एतासां कथानां ध्वनिप्रक्षेपणं क्रियते”)Guru Gobind Singh, the revered leader of the Sikhs, had four sons who attained martyrdom in battle against the Mughals. Upon hearing this news, his wife was overwhelmed with grief and began to weep loudly due to the loss of her sons. At that moment, Guru Gobind Singh consoled her by saying, "Those who attain heroic death in a righteous war are immortal sons. Be proud of them." He further said, "Parents who lose their children must be comforted by us. Consider the people as our children. When our thinking changes, sorrow transforms into joy. Therefore, the wise say — let us live in the world unattached, and remain devoted to our duties."

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अमृतपुत्राः

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Shyambhai Y Thakar’s Podcast Shyambhai Thakar श्यामभाई ठाकर, यह नाम आज श्रीमद्भागवत, रामकथा, श्रीमद्भगवद्गीता और हिंदू धर्मग्रंथों की हिंदू परंपरा के विद्वान, प्रामाणिक, मधुरभाषी प्रवक्ता के रूप में भारत और विदेशों में हिंदू समुदाय में जाना जाने लगा है। भारतीय संस्कृति से लहलहाते ध्वज के गौरव विस्तारक पूज्यभाईश्री रमेशभाई ओझाजी द्वारा भारत की सनातनी संस्कृति को समर्पित श्री बाबडेश्वर संस्कृत महाविद्यालय, सांदीपनि विद्यानिकेतन, पोरबंदर में संस्कृत व्याकरण में आचार्य (M.A) तक शिक्षाप्राप्त श्यामभाई, श्रीमद्भागवत आदि को केवल प्रवचनका ही विषय न मानते हुए अपनी सहज दिनचर्या के रूप में श्रीमद्भागवत, गीता, रामचरितमानस, महाभारत और हाल के लेखकों के श्रेष्ठ साहित्य का अध्ययन करते रहते है। उनकी सत्संग यात्रा, जो 1999 से जारी है, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीकी देशों में 165 से अधिक कथाओं और ग्रंथों के शतावधि मूल पारायणोंके रूप में विस्तृत हुई है और फैलती जा रही है। पूज्यभाईश्री की आज्ञा और आशीर्वाद से, कथावाचन के साथ साथ श्यामभाई सांदीपनि में, आज के छात्रों और भविष्य के कथाकारों को मूल श्रीमद्भागवत ग्रंथ का 2011 से अध्ययन कराते हैं, जो कि आज Jai Jai Hanuman Gosai Hubhopper हनुमान चालीसा की सैंतीसवी चौपाई “जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाई।।” में तुलसीदास जी कहते है "हे स्वामी हनुमानजी। आपकी जय हो, जय हो, जय हो। आप मुझ पर कृपालु श्री गुरुजी के समान कृपा कीजिए। तुलसीदास जी यहाँ केहना चाहते है की जीवन में और कोई योग्य गुरु न मिले तो हनुमान जी को गुरु और हनुमान चालीसा को ही मंत्र बना लीजिए। Pinaak Podcast - पिनाक पॉडकास्ट Vivek & Vidushi Sharma पिनाक पॉडकास्ट में आपका स्वागत है, यहां हम वैदिक ज्ञान की गहराई, पुराणों की समृद्धि और इतिहास को आकार देने वाली मनोरम कहानियों के माध्यम से यात्रा पर निकलते हैं। हमारा पॉडकास्ट प्राचीन ज्ञान को उजागर करने, पौराणिक ग्रंथों की कथाओं को डिकोड करने और ऐतिहासिक कहानियों के महत्व की खोज करने के लिए समर्पित है।हमसे जुड़ें क्योंकि हम वैदिक शिक्षाओं के सार में उतरते हैं, अतीत और वर्तमान दोनों में उनकी कालातीत प्रासंगिकता में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। सावधानीपूर्वक विश्लेषण के माध्यम से, हम पौराणिक कहानियों में निहित सांस्कृतिक विरासत और गहन संदेशों को उजागर करते हैं।इसके अतिरिक्त, हम ऐतिहासिक वृत्तांतों में जान फूंकते हैं, सबक और अंतर्दृष्टि निकालते हैं जो हमारी आधुनिक दुनिया में गूंजती रहती है। चाहे आप अनुभवी विद्वान हों या जिज्ञासु शिक्षार्थी, पिनाक पॉडकास्ट बौद्धिक रूप से प्रेरक सामग्री प्रदान करता है जो ज्ञान, कहानी कहने और इतिहास के संगम का जश्न मनाता है।पिनाक पॉडकास्ट देखें और अपने आप को प्राचीन ज्ञान, कालातीत कहानियों और मनोरम इतिहास की दुनिया में डुबो द खोड्या आणि इतर कथा Khodya aani itar Katha Voicemantra दिलीपराज प्रकाशन ने प्रकाशित केलेल्या व सांत्वना शुक्ल ने कथन केलेला हा पॉडकास्ट आहे शाळकरी मुलांच्या गोष्टींचा . हा पॉडकास्ट योगेश सोमण यांच्या खोड्या आणि इतर कथा या पुस्तकावर आधारित आहे यात खोडकर मुलांच्या गमतीदार गोष्टी आहेत .पिंट्या , झिपऱ्या ,चिन्या,रघ्या, बाप्पा, ढब्ब्या ,गुड्डी यांच्या उपदव्यापी गॅंग मधले सगळेजण दिवसभरात काही न काही खोड्या करत असतात . या कथांमधून त्यांच्या निरागस खोड्यांचे वर्णन आहे .सर्वच वयाच्या श्रोत्यांना त्या आवडतील . मुलांना करमणुकीचा तर मोठ्यांना आठवणींचा आनंद घेता येईल.

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