EPISODE · Jul 21, 2026 · 2 MIN
Apna Yatna Mein | Savita Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अपनी यातना में । सविता सिंह वह सो चुकी थी कई नींदेंकई दिन और रातें बीत चुकी थींकई ज़िंदगियाँ बन और बिखर चुकी थीं इस बीचलेकिन एक सपना था जो अब भी झिलमिला रहा थाजिसकी झालर को पकड़ वह उठी थीऔर उन फूलों को ढूँढ़ने लगी थीजिन्हें सीने से लगा वह सोने गई थीजागने पर यह संसार उसे अब भीबहुत जाना-पहचाना ही लगा थाफूल भले अनुपस्थित थेलेकिन उसके प्रेमी वहाँ खड़े थे बाँहें फैलाएहर हाल में प्रेम बचा रहता है उसने सोचा थाफिर आह्लादित हो ख़ुद से कहा थाआसमान को छत और धरती को बिस्तर बनासमुद्र की तरह कोई गीत गाना चाहिएतभी उसका एक प्रेमी उसे बालों से पकड़खींचता हुआ ले गया नींद और सपनों से बाहरसमेटे हुए अपने सीने में चुराए उसके सारे फूलजहाँ सब कुछ नया था अपनी यातना में
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