EPISODE · Jan 1, 2026 · 2 MIN
Apne Hisse Mein Log Aakash Dekte Hain | Vinod Kumar Shukla
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
अपने हिस्से में लोग आकाश देखते हैं। विनोद कुमार शुक्लअपने हिस्से में लोग आकाश देखते हैंऔर पूरा आकाश देख लेते हैंसबके हिस्से का आकाशपूरा आकाश है।अपने हिस्से का चंद्रमा देखते हैंऔर पूरा चंद्रमा देख लेते हैंसबके हिस्से का चंद्रमा वही पूरा चंद्रमा है।अपने हिस्से की जैसी-तैसी साँस सब पाते हैंवह जो घर के बग़ीचे में बैठा हुआअख़बार पढ़ रहा हैऔर वह भी जो बदबू और गंदगी के घेरे में ज़िंदा है।सबके हिस्से की हवा वही हवा नहीं है।अपने हिस्से की भूख के साथसब नहीं पाते अपने हिस्से का पूरा भातबाज़ार में जो दिख रही हैतंदूर में बनती हुई रोटीसबके हिस्से की बनती हुई रोटी नहीं है।जो सबकी घड़ी में बज रहा हैवह सबके हिस्से का समय नहीं है।इस समय।
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