EPISODE · Oct 8, 2025 · 2 MIN
Awara Ke Daag Chahiye | Devi Prasad Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
आवारा के दाग़ चाहिए | देवी प्रसाद मिश्रदो वक़्तों का कम से कम तो भात चाहिएगात चाहिए जो न काँपेसत्ता के सम्मुख जो कह दूँबात चाहिए कि छिप जाने को रात चाहिएपूरी उम्र लगें कितने ही दाग़ चाहिएमात चाहिए बहुत इश्क़ में फ़ाग चाहिएराग चाहिए साथ चाहिएउठा हुआ वह हाथ चाहिए नाथ चाहिए नहींकि अपना माथ चाहिए झुके नहीं जोराख चाहिए इच्छाओं की भूख लगी हैसाग चाहिए बाग़ चाहिए सोना है अबलाग चाहिए बहुत विफल का भाग चाहिएआवारा के दाग़ चाहिए बहुत दिनों तक गूँजेगी जोआह चाहिए जाकर कहीं लौटकर आती राह चाहिएइश्क़ होय तो आग चाहिए।
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