EPISODE · Jun 25, 2024 · 2 MIN
Baad Ke Dinon Mein Premikayein | Rupam Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बाद के दिनों में प्रेमिकाएँ | रूपम मिश्रा बाद के दिनों में प्रेमिकाएँ पत्नियाँ बन गईंवे सहेजने लगीं प्रेमी को जैसे मुफलिसी के दिनों में अम्मा घी की गगरी सहेजती थींवे दिन भर के इन्तजार के बाद भी ड्राइव करते प्रेमी से फोन पर बात नहीं करतींवे लड़ने लगीं कम सोने और ज़्यादा शराब पीने परप्रेमी जो पहले ही घर में बिनशी पत्नी से परेशान थाअब प्रेमिका से खीजने लगावो सिर झटक कर सोचता कि कहीं गलती सेउसने फिर से तो एक ब्याह नहीं कर लियापत्नियाँ जो कि फोन पर पति की लरजती मुस्कान देख खरमनशायन रहतींउनकी अधबनी पूर्वधारणाएँ गझिन होतींप्रेमी यहाँ भी चूकते, वे मुस्कान और सम्बन्ध दोनों सहेजने में नाकाम होतेजबकि प्रेमिकाएँ यहाँ भी ज़िम्मेदार ही साबित रहींवे खचाखच भरी मेट्रो और बस में भी हँसी के साथ इमेज भी मैनेज करतींप्रेमिकाएँ भी खुद के पत्नी बनने पर थोड़ी-सी हैरान ही थींआख़िर ये पत्नीपना हममें आता कहाँ से हैप्रेमी खिसियाए रहे कि ये लड़कियाँ कभी कायदे से आधुनिक नहीं हो सकतींहमेशा बीती बातें, बीती रातों के ही गीत गाती हैं ख़ैर ये वो प्रेमी नहीं थे जो प्रेमिका का फोन खुद रिचार्ज कराते बाद उसका रोना रोतेये करिअरिज्म व बाजार के दरमेसे प्रेमी थे जो जीवन की दौड़ में सरपट भाग रहे थेऔर इस दौड़ारी में प्रेम उनकी जेब से अक्सर गिर कर बिला जाता है।
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