EPISODE · Jun 19, 2024 · 1 MIN
Baarish Ki Bhasha | Shahanshah Alam
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बारिश की भाषा | शहंशाह आलम उसकी देह कितनी बातूनी लग रही हैजो बारिश से बचने की ख़ातिर खड़ी हैजामुन पेड़ के नीचे जामुनी रंग के कपड़े में‘जामुन ख़रीदकर घर लाए कितने दिन हुए’हज़ारों मील तक बरस रही बारिश के बीचवह लड़की क्या ऐसा सोच रही होगीया यह कि इस शून्यता में जामुन का पेड़बारिश से उसको कितनी देर बचा पाएगाबारिश किसी नाव की तरहबाँधी नहीं जा सकती, यह सच हैजामुन का पककर गिरना भीबाँधा नहीं जा सकताबारिश को रुकना होता है तो ख़ुद रुक जाती हैबरसना होता है तो ख़ुद बरसने लगती है घनघोरतभी बारिश है लड़की है जामुन का पेड़ है तभी बारिश की भाषा है मेरे कानों तक सुनाई देती।
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