EPISODE · Aug 24, 2025 · 2 MIN
Bairang Benaam Chithiyaan | Ramdarash Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बैरंग बेनाम चिट्ठियाँ | रामदरश मिश्रकब सेयह बैरंग बेनाम चिट्ठी लिये हुएयह डाकिया दर-दर घूम रहा है कोई नहीं है वारिस इस चिट्ठी काकौन जानेकिसका अनकहा दर्दकिसके नामइस बन्द लिफाफे मेंपत्ते की तरह काँप रहा है?मैंने भी तोएक बैरंग चिट्ठी छोड़ी हैपता नहीं किसके नाम?शायद वह भी इसी तरहसतरों के होंठों में अपने दर्द कसेयहाँ-वहाँ घूम रही होगीमित्रों!हमारी तुम्हारी ये बैरंग लावारिस चिट्टठियाँपरकटे पंछी की तरहकिसी दिन लावारिस जगहों पर और कभी किसी दिनपड़ी-पड़ी फड़फड़ाएँगीकोई अजनबीइन्हें कौतूहलवश उठाकर पढ़ेगातो तड़प उठेगाओह!बहुत दिन पहले किसी नेये चिट्ठियाँशायद मेरे ही नाम लिखी थीं।
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