EPISODE · Mar 25, 2026 · 3 MIN
Bas Ek Kaam Yehi Baar Baar Karta Tha | Madhav Kaushik
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बस एक काम यही बार बार करता था । माधव कौशिकबस एक काम यही बार बार करता थाभँवर के बीच से दरिया को पार करता थाउसी की पीठ पर उभरे निशान ज़ख़्मों केजो हर लड़ाई में पीछे से वार करता थाअजीब शख़्स था ख़ुद अलविदा कहा लेकिनहर एक शाम मेरा इंतिज़ार करता थासुना है वक़्त ने उस को बना दिया पत्थरजो रोज़ वक़्त को भी संगसार करता थाहवा ने छीन लिया अब तो धूप का जादूनहीं तो पेड़ भी पत्तों से प्यार करता था
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