EPISODE · Mar 6, 2026 · 1 MIN
Basant | Kedarnath Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बसन्त | केदारनाथ सिंहऔर बसन्त फिर आ रहा हैशाकुन्तल का एक पन्नामेरी अलमारी से निकलकरहवा में फरफरा रहा हैफरफरा रहा है कि मैं उठूँऔर आस-पास फैली हुई चीज़ों के कानों मेंकह दूँ 'ना'एक दृढ़और छोटी-सी 'ना'जो सारी आवाज़ों के विरुद्धमेरी छाती में सुरक्षित हैमैं उठता हूँदरवाज़े तक जाता हूँशहर को देखता हूँहिलाता हूँ हाथऔर ज़ोर से चिल्लाता हूँ –ना...ना...नामैं हैरान हूँमैंने कितने बरस गँवा दियेपटरी से चलते हुएऔर दुनिया से कहते हुएहाँ हाँ हाँ...
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