EPISODE · Mar 28, 2025 · 2 MIN
Beej Pakhi | Hemant Deolekar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बीज पाखी | हेमंत देवलेकर यह कितना रोमांचक दृश्य है:किसी एकवचन को बहुवचन में देखनापेड़ पैराशुट पहनकर उत्तर रहा है।वह सिर्फ़ उतर नहीं रहाबिखर भी रहा है।कितनी गहरी व्यंजना : पेड़ को हवा बनते देखने मेंसफ़ेद रोओं के ये गुच्छेमिट्टी के बुलबुले हैपत्थर हों या पेड़ मन सबके उड़ते हैंहर पेड़ कहीं दूरफिर अपना पेड़ बसाना चाहता हैऔर यह सिर्फ़ पेड़ की आकांक्षा नहींआब-ओ-दाने की तलाश में भटकता हर कोईउड़ता हुआ बीज है।
Embed this episode
NOW PLAYING
Beej Pakhi | Hemant Deolekar
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.