EPISODE · Dec 31, 2023 · 4 MIN
Bhaap | Shahanshah Alam
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
भाप | शहंशाह आलमसमुद्र की भाप होकर गया पानीवापस लौट आता हैया जो रेत की भाप गईलौट आई बारिश बनकरशब्द की भाप गईवह भी दिमाग़ को भेदती लौट आईपछतावे की भाप गईफिर जूते के तल्ले के आगे दबी आकरभाप बनकर गया लड़की का ख़्वाबअब नहीं लौटता चाहकरदबे पाँव ख़्वाब जैसे लौट आता थाघोड़ी पर सवार लड़का बनकरअसर कम हो गया है माँ की दुआओं कातभी हत्यारा अपनी भीड़ में पाकर मार डालता हैआग की भाप के बीच राँगे का लेप चढ़ाते क़लईगर कोभीड़ किसी तफ़तीश से पहलेसारे सबूत मिटा चुकी होती हैकई बार मैं जीना चाहता था जिस तरह पेड़ जीते हैंऑक्सीजन की भाप पूरी पृथ्वी पर फैलाते हुए मगरजीने कहाँ दिया जाता है बूँदाबाँदी के बीच गाना गातेभाप तक कहाँ थी औरत की देह पर एक जोड़ी के सिवाजिसको नोचा-खसोटा गया अपनी मिल्कियत समझकरक्या चाँद पर भी पानीपत्थर से टकराकर भाप बनाता होगाजैसे बना लेते हैं प्रेमी जोड़ेएक-दूसरे की साँसों से भापजहाँ पर युद्ध होता होगा लंबावहाँ पर शर्तिया भाप बनती होगीटैंक से छोड़े गए गोला-बारूद कीगोला-बारूद से निकली हुई भापबर्बर होती होगी मेरे राजा की तरहयह सच है एकदम सच हैजैसे कि भाप का बनना सच हैइन दरियाओं के बीच।
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