EPISODE · Mar 3, 2024 · 2 MIN
Bhookhdaan | Mehboob
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
भूखदान | महबूब शांत अंधेरे सन्नाटे के बीच चीखती गुजरती एक आवाज़ लोहे के लोहे से टकराने कीया उस भूखे पेट के गुर्राने की जो लेटा है उसी लोहे के सड़क किनारे किसी भिनभिनाती-सी जगह पर खेल रही हैं कुछ मक्खियाँ उसके मुख परजैसे वो जानती हों कि गरीब यहाँ सिर्फ खेलने की चीज है इस बीच कुछ लोग गुज़रे उधर से उसे निहारते हुएकोई हँसा कोई मुस्कुराया किसी को घृणा हुई किसी ने अफसोस जताया आखिर करते भी क्या बेचारे इंसान जो ठहरे इनके पास कहाँ इतना वक्त कि जिस थाली के सिर्फ दो निवाले खाने के बाद उससे कूड़े दान का पेट भर दिया गया उसी थाली से उस पेट को भर देजिसमें से आ रही थी वह सन्नाटे को चीरने वाली आवाज और वो शख्स अभी भी घुटनों से पेट को जकड़े हुए हाथों से घुटनों को पकड़े हुएइसी इंतज़ार में बैठा है कि कोई तो अपनीझूठी थाली कूड़ेदान को ना देकर भूखदान को देगा
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