EPISODE · Dec 9, 2023 · 2 MIN
Billiyaan | Rajesh Joshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
बिल्लियाँ - राजेश जोशी मन के एक टुकड़े से चांद बनाया गयाऔर दूसरे से बिल्लियाँमन की ही तरह उनके भी हिस्से में आया भटकनाअव्वल तो वे पालतू बनती नहीं और बन जाएंतो भरोसे के लायक नहीं होतींउनके पांव की आवाज़ नहीं होतीहरी चालाकी से बनाई गयीं उनकी आंखेंअंधेरे में चमकती हैंचांद के भ्रम में वो भगोनी में रखा दूध पी जाती हैंमन के एक हिस्से से चांद बनाया गयाऔर दूसरे से बिल्लियाँचांद के हिस्से में अमरता आईऔर बिल्लियों के हिस्से में मृत्युइसलिए चांद से गप्प लड़ाते कवि काउन्होंने अक्सर रास्ता काटाइस तरह कविता में संशय का जन्म हुआवो अपने सद्य: जात बच्चे को अपने दांतों के बीचइतने हौले से पकड़कर एक जगह सेदूसरी जगह ले जाती हैंकवि को जैसे भाषा को बरतने का सूत्रसमझा रही हों।
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