EPISODE · May 17, 2026 · 2 MIN
Chandroday Humne Kabse Nahi Dekha | Gyanendrapati
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
चन्द्रोदय हमने कब से नहीं देखा । ज्ञानेन्द्रपति चन्द्रोदय!हमने कब से नहीं देखाप्रायः उस समयटी.वी. के किसी-न-किसी चैनल परकोई-न-कोई नैनसुख कार्यक्रम चलता रहता हैकोई-न-कोई चन्द्रमुखीउजागर कर रही होती हैहमारे जीवन का अँधेराऔर कभी जबदेर से घर लौटतेकिसी क्षितिजवान सड़क के माथ पर औचकदिखा कभी नवोदित चाँद, देखताअनदेखी की हमनेआँख मिलाने से डरेसड़क पकड़े चलते गए आदतनकि आँखें मिलने पर पूछना होगा हाल-चालअफसोस के दो शब्द कहने होंगेहो जाएगी अवेरजबकि जल्दी है आजजबकिशुक्ल पक्ष का था वह चाँदहर दिन अपनी एक कला बढ़ाताउदार हँसमुखकृष्ण पक्ष का क्रमशः कृश भी होता वहअँजोर-भरी होती उसकी अँजुरीहृदय में न टिकने देती अंधियाराचन्द्रोदय!हमने कब से नहीं देखाचन्द्रोदय! जिसे निहारती है नदीअपने सूर्य-क्लान्त सीने में उतारती है।
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