EPISODE · Dec 23, 2025 · 2 MIN
Cheekho Dost | Pratibha Katiyar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
चीख़ो दोस्त - प्रतिभा कटियारचीख़ो दोस्तकि इन हालात मेंअब चुप रहना गुनाह हैऔर चुप भी रहो दोस्तकि लड़ने के वक़्त मेंमहज़ बात करना गुनाह हैफट जाने दो गले की नसेंअपनी चीख़ सेकि जीने की आख़िरी उम्मीद भीजब उधड़ रही होतब गले की इन नसों कासाबुत बच जाना गुनाह हैचलो दोस्तकि सफ़र लंबा है बहुतठहरना गुनाह हैलेकिन कहीं न जाते हों जो रास्तेउन रास्तों पर बेसबब चलते जानाभी तो गुनाह हैहँसो दोस्तउन निरंकुश होती सत्ताओं परजो अपनी घेरेबंदी में घेरकर, गुमराह करकेहमारे ही हाथों हमारी तक़दीरों परलगवा देते हैं तालेकि उनकी कोशिशों परनिर्विकार रहना गुनाह हैऔर रो लो दोस्त किबेवजह ज़िंदगी से महरूम कर दिए गए लोगों केलिए न रोना भी गुनाह हैमर जाओ दोस्त कितुम्हारे जीने सेजब फ़र्क़ ही न पड़ता हो दुनिया कोतो जीना गुनाह हैऔर जियो दोस्त किबिना कुछ किएयूँ हीमर जाना गुनाह है...
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