EPISODE · May 3, 2026 · 2 MIN
Daant Ki Khidki | Nilesh Raghuvanshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
दाँत की खिड़की। नीलेश रघुवंशीबारिश से पहले बादलों की गड़गड़ाहटबिजली के चमकने-सा मुस्कराता चेहरा सहेली कातिस पर "पहचाना-पहचाना' भरी बारिश में छपाक-छपाक की आवाज़हा याद आया अपन एक बार..कहते सिर खुजलानापीठ पर पड़ती धौल तुम क्यों पहचानोगी भैयाझमाझम बारिश में बिना छतरी के भीग-भीग जानागलबहियाँ डाल सहेली करो याद करो याद की रट लगाएघूमते हैं आँखों के आगे हजारों हज़ार चेहरेअँटता नहीं जिनमें चेहरा सहेली काचमकी बिजली ज़ोर से...स्कूल के दिनों में शरमाकर हँसती थी जब सहेलीझिलमिलाती थी उसके दाँतों के बीच की जगहजिसे हम सब दाँत की खिड़की कह चिढ़ाते खूबओह याद...याद आया मेरी प्यारी दात की खिडकीकह झूमती हूँ सहेली सेहटो दूर दूर हटो इतनी देर बाद पहचानींभरी बरसात में ज़ोर से चमकती है बिजलीदूर उड़ती जाती छतरी की तरह रुकती नहीं हमारी हँसी
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